दूध की कीमत पर ‘आर-पार’—अब किसान पीछे हटने को तैयार नहीं!
हजारों दुग्ध उत्पादकों ने भरी हुंकार, करजोदा में गूंजा किसानों का आक्रोश; 1 सितंबर को कलेक्टर कार्यालय पर धरने का ऐलान, सरकार के फैसले पर टिकी नजर
देपालपुर। लगातार बढ़ती महंगाई और पशु आहार की आसमान छूती कीमतों ने दुग्ध उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है। दूध उत्पादन की बढ़ती लागत के मुकाबले उचित दाम नहीं मिलने से किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर इंदौर जिला ग्रामीण दूध उत्पादक किसान संगठन के आह्वान पर देपालपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम करजोदा में किसानों की विशाल बैठक आयोजित हुई। बैठक में बड़ी संख्या में दुग्ध उत्पादक किसान जुटे और अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया।
‘सब कुछ महंगा, फिर दूध के दाम पर चुप्पी क्यों?’
बैठक में किसान नेताओं ने सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। किसान नेता दिलीप सिंह पंवार और हंसराज मंडलोई ने कहा कि पशु आहार, चारा, दवाइयों और पशुपालन से जुड़े अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में पुराने दामों पर दूध बेचना किसानों के लिए घाटे का सौदा बनता जा रहा है।
किसानों का सवाल सीधा है—जब रोजमर्रा की जरूरत की लगभग हर वस्तु महंगी हो रही है, तो दूध की कीमत तय करने में किसान की लागत और मेहनत को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही?
किसानों ने घोषित किए दूध के नए दाम
बैठक में किसानों ने अपनी लागत और परिस्थितियों को देखते हुए दूध के नए दाम तय करने की घोषणा की।
भैंस का दूध — ₹70 प्रति लीटर
गाय का दूध — ₹60 प्रति लीटर
फैट — ₹12 प्रति फैट
किसानों ने कहा कि मौजूदा लागत में इनसे कम कीमत पर दूध बेचना पशुपालकों के लिए आर्थिक संकट को और बढ़ाने वाला है।
1 सितंबर को कलेक्टर कार्यालय पर होगा धरना
बैठक में किसानों ने शासन-प्रशासन को 1 सितंबर तक मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने का अल्टीमेटम दिया। किसानों का कहना है कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 1 सितंबर को इंदौर कलेक्टर कार्यालय पर विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि दुग्ध उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यदि पशुपालकों को उनकी लागत और मेहनत के अनुरूप कीमत नहीं मिली तो इसका असर सिर्फ किसान पर नहीं, बल्कि पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
आंदोलन को मिला समर्थन
बैठक में भारतीय किसान मजदूर सेना के प्रवीण ठाकुर रिंगनवास ने भी किसानों के आंदोलन को समर्थन दिया। वहीं चंदनसिंह बडवाया, अशोक चौहान, मुकेश चौहान, दिनेश चौहान, अंतरसिंह राठौर, कैलाश पटेल, सत्यनारायण चौहान, आनंद सिसोदिया, रोहित पंवार, अनिल जाधव, राहुल बढ़वाया, लक्ष्मण सिंह, लाखन सिंह और राहुल चौहान सहित कई किसान प्रतिनिधि मौजूद रहे।
अब सरकार के फैसले का इंतजार
करजोदा की बैठक से किसानों ने साफ संकेत दिया है कि दूध की कीमत का मुद्दा अब गांव की चौपाल तक सीमित नहीं रहेगा। 1 सितंबर को कलेक्टर कार्यालय पर होने वाला प्रदर्शन सरकार और प्रशासन के लिए अगली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
किसान नेताओं ने कहा कि यदि मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर हड़ताल व चक्का जाम जैसे कदम उठाने की चेतावनी भी दी गई है।
अब निगाहें सरकार पर हैं—क्या किसानों की मांगों पर समय रहते फैसला होगा या 1 सितंबर को इंदौर में दूध उत्पादकों का आंदोलन और तेज होगा?




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