ग्राम पंचायत जाकूखेड़ी में भ्रष्टाचार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। आरोप है कि सरपंच पति और सरपंच पुत्र की बाप–बेटे की जोड़ी ने मिलकर पंचायत को निजी जागीर बना लिया है और सरकारी योजनाओं को खुलेआम लूट का जरिया बना दिया है। एक के बाद एक सामने आ रहे मामलों ने पंचायत की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निगरानी दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




 जाकूखेड़ी पंचायत में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा, बाप–बेटे की जोड़ी ने पंचायत को लगाया चूना

फर्जी जॉब कार्ड, कागजी तालाब और दूसरी पंचायत की जमीन पर लाखों का खेल


जाकूखेड़ी।

ग्राम पंचायत जाकूखेड़ी में भ्रष्टाचार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। आरोप है कि सरपंच पति और सरपंच पुत्र की बाप–बेटे की जोड़ी ने मिलकर पंचायत को निजी जागीर बना लिया है और सरकारी योजनाओं को खुलेआम लूट का जरिया बना दिया है। एक के बाद एक सामने आ रहे मामलों ने पंचायत की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निगरानी दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


फर्जी जॉब कार्ड और कागजी तालाब का बड़ा खुलासा


ताज़ा और गंभीर मामला राऊ निवासी पुष्पा बाई पति बाबूलाल चौधरी के नाम से जुड़ा है। आरोप है कि जाकूखेड़ी पंचायत द्वारा उनके नाम पर फर्जी जॉब कार्ड बनवाकर और खेत-तालाब निर्माण दिखाकर पंचायत रिकॉर्ड में लाखों रुपये का खर्च दर्शा दिया गया।


 *इस पूरे मामले में पुष्पा बाई के पति बाबूलाल चौधरी ने सामने आकर स्पष्ट कहा—* 


> “मैंने जो जमीन खरीदी है, वह ग्राम पंचायत खेड़ीसिहोद की सीमा में आती है।

मेरी जमीन का ग्राम पंचायत जाकूखेड़ी से कोई लेना-देना नहीं है।”

उन्होंने आगे बताया—


> “करीब 5 साल पहले मैंने सरपंच पुत्र अरबअली पटेल से जमीन खरीदी थी।

उसी जमीन पर 2 साल पहले मैंने अपने निजी खर्च से खेत-तालाब निर्माण कराया, जिसमें लगभग ₹6 लाख खर्च हुए।

इसके लिए मुझे जाकूखेड़ी पंचायत से किसी भी योजना का कोई लाभ नहीं मिला।”

 *बिना मजदूरी के जॉब कार्ड — सीधा फर्जीवाड़ा* 


सबसे चौंकाने वाला आरोप फर्जी जॉब कार्ड को लेकर है। *बाबूलाल चौधरी का कहना है—* 

> “मेरी पत्नी पुष्पा बाई ने कभी मनरेगा में मजदूरी नहीं की।

इसके बावजूद सरपंच पुत्र अरबअली पटेल द्वारा उनका जॉब कार्ड बनवाया गया।

यह पूरी तरह फर्जी है।”


 *उन्होंने यह भी स्पष्ट किया*—

> “मैं राऊ क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज का मालिक हूं।

मजदूरी करने या जॉब कार्ड का उपयोग करने का सवाल ही नहीं उठता।”

दूसरी पंचायत की जमीन, लेकिन खर्च जाकूखेड़ी का!

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जमीन पर खेत-तालाब निर्माण दिखाया गया, वह जाकूखेड़ी पंचायत क्षेत्र में आती ही नहीं। इसके बावजूद पंचायत रिकॉर्ड में उसी जमीन पर सरकारी खर्च दर्शाया गया, जो सीधे तौर पर सरकारी धन की हेराफेरी की ओर इशारा करता है।

पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी जाकूखेड़ी पंचायत में—

मनरेगा में फर्जी काम और फर्जी भुगतान

कचरा गाड़ी वर्षों तक न चलाकर भी हर माह ₹9,199 की किश्त कटना

खेत-तालाब के नाम पर अपात्रों को लाभ

गरीबी राशन कार्ड में अपात्र लोगों के नाम जोड़ना

जैसे कई मामलों में बाप–बेटे की भूमिका सामने आ चुकी है।

अब प्रशासन के सामने बड़े सवाल

इस पूरे प्रकरण ने प्रशासन के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—

फर्जी जॉब कार्ड किसके आदेश से बनाए गए?

जब जमीन जाकूखेड़ी पंचायत की नहीं थी, तो भुगतान कैसे हुआ?

मजदूरी की फर्जी एंट्री किसने की?

और निकाली गई सरकारी राशि आखिर किसकी जेब में गई?

 *वाघेला एक्सप्रेस की आवाज़* 

“जब जमीन दूसरी पंचायत की हो, लाभार्थी ने कभी मजदूरी न की हो, पंचायत से कोई लाभ न लिया हो — फिर भी कागजों में लाखों का खर्च दिखाया जाए, तो यह लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित घोटाला है। जाकूखेड़ी पंचायत में बाप–बेटे की जोड़ी ने योजनाओं को लूट का साधन बना दिया है।”


ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनपद सीईओ और जांच एजेंसियों से मांग की है कि जाकूखेड़ी पंचायत में हुए सभी विकास कार्यों, जॉब कार्ड और भुगतान की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि पंचायत व्यवस्था में जनता का भरोसा बहाल हो सके।

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