"गांव का मास्टर प्लान जरूरी
नीरज द्विवेदी इंदौर
दिनेश दत्तात्रेय कुलकर्णी ने भूमि अधिग्रहण से वर्तमान में हो रही समस्याओं पर आयोजित कार्यशाला में जोर देकर कहा कि भूमि अधिग्रहण किसानों के लिए अब अभिशाप बनता जा रहा है। शहरों के विस्तार और तेज़ी से बढ़ते औद्योगिकीकरण के कारण संचित कृषि भूमि लगातार समाप्त हो रही है। इसका सीधा असर किसानों की आजीविका पर पड़ रहा है, जिससे वे बेरोजगारी की ओर धकेले जा रहे हैं और गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण आबादी का शहरों की ओर बढ़ता दबाव अब एक गंभीर समस्या बन चुका है। इससे न केवल शहरों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है, बल्कि खेती योग्य जमीन का भी लगातार नुकसान हो रहा है।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि जिस तरह शहरों के लिए मास्टर प्लान बनाए जाते हैं, उसी तरह गांवों के लिए भी तहसील स्तर पर सुनियोजित मास्टर प्लान तैयार किया जाए। यदि सरकार गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की पर्याप्त सुविधाएं विकसित करे, तो भूमि अधिग्रहण और पलायन जैसी समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। भारतीय किसान संघ इस दिशा में हर स्तर पर पहल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कुलकर्णी ने आगे बताया कि वर्ष 2013 में व्यापक शोध और विचार-विमर्श के बाद बनाया गया भूमि अधिग्रहण कानून अपने आप में संतुलित और प्रभावी था। हालांकि बाद में किए गए संशोधनों का विरोध भी हुआ, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें मान्यता दे दी। इसके बावजूद वर्तमान स्थिति और अधिक जटिल होती जा रही है, क्योंकि कई राज्य सरकारें इस कानून की अनदेखी कर अपने स्तर पर नए तरीके अपनाने लगी हैं।
मध्य प्रदेश में लागू लैंड पूलिंग योजना का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह योजना सहकारिता के सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें किसानों से स्वेच्छा से भूमि लेकर बदले में विकसित भूखंड देने का वादा किया जाता है। लेकिन व्यवहार में इस योजना में भी कई विसंगतियां सामने आ रही हैं। कई मामलों में किसानों को सही जानकारी नहीं दी जाती और उनकी अनभिज्ञता का फायदा उठाकर उनकी उपजाऊ जमीन विकास के नाम पर अधिग्रहित कर ली जाती है।
उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई बार कानून के प्रावधानों को दरकिनार कर भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। सड़क, आवास या अन्य परियोजनाओं के नाम पर बिना उचित प्रक्रिया अपनाए किसानों की जमीन ली जा रही है, जो चिंताजनक है।
कार्यशाला में यह भी निर्णय लिया गया कि जिला और तहसील स्तर पर ऐसी टीम बनाई जाएगी जो किसानों को भूमि अधिग्रहण से जुड़े कानूनों की सही जानकारी दे और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी अधिग्रहण प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का पूर्ण पालन हो।
इस अवसर पर वक्ताओं ने यह भी सुझाव दिया कि यदि किसी परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए नहीं होता है, तो वह जमीन किसानों को वापस दी जानी चाहिए। साथ ही, प्रभावित किसानों को बाजार मूल्य के आधार पर उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
अंत में कुलकर्णी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते भूमि अधिग्रहण की अनियंत्रित प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में यह देश के लिए गंभीर सामाजिक और आर्थिक संकट का कारण बन सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि अनावश्यक भूमि अधिग्रहण को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और गांवों के लिए ठोस मास्टर प्लान तैयार किया जाए, ताकि विकास और किसानों के हितों के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
✦ कार्यशाला में प्रस्तुत महत्वपूर्ण सुझाव ✦
🔹 भूमि अधिग्रहण पर नियंत्रण
संचित (उपजाऊ) भूमि का अधिग्रहण केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही किया जाए, ताकि कृषि और किसानों के हित सुरक्षित रह सकें।
🔹 बंजर भूमि पर औद्योगिक विकास
“संजीव को निर्जीव और निर्जीव को संजीव बनाने” की नीति अपनाते हुए बंजर एवं अनुपयोगी भूमि को उद्योगों के लिए आरक्षित किया जाए। इससे एक ओर औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण पलायन की समस्या का समाधान भी होगा। उपजाऊ भूमि को केवल कृषि कार्य हेतु सुरक्षित रखा जाए।
🔹 फास्ट ट्रैक न्यायालय की स्थापना
भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों के त्वरित निराकरण के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएं, ताकि किसान पीढ़ी दर पीढ़ी न्याय के लिए भटकने को मजबूर न हों।
🔹 संवेदनशीलता और विधि का पालन अनिवार्य
भूमि अधिग्रहण जैसे संवेदनशील मामलों में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कानून का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, संवेदनहीनता के बजाय मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए।
🔹 कानूनी विशेषज्ञों की टीम का गठन
हर तहसील स्तर पर भूमि अधिग्रहण कानून के विशेषज्ञों की टीम गठित की जाए, जिससे अधिग्रहण करने वाली एजेंसियां सभी कानूनी प्रावधानों का सही तरीके से पालन कर सकें।
🔹 किसानों को कानून की जानकारी
भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों की जानकारी किसानों तक प्रभावी रूप से पहुंचाई जाए, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रह सकें।
🔹 लैंड पूलिंग योजना पर पुनर्विचार
मध्य प्रदेश में लैंड पूलिंग योजना को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए। यदि अधिग्रहण आवश्यक हो, तो केवल 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार ही प्रक्रिया अपनाई जाए।
🔹 विकास प्राधिकरण की भूमिका सीमित हो
प्रदेश के विकास प्राधिकरणों को केवल मास्टर प्लान के अंतर्गत सड़कों के निर्माण तक सीमित रखा जाए। “अफॉर्डेबल हाउसिंग” के नाम पर हो रहे किसी भी प्रकार के भ्रामक कार्यों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
🔹 मुआवजा निर्धारण में पारदर्शिता
मुआवजे की गणना करते समय जिला कलेक्टर द्वारा नियमों का सख्ती से पालन किया जाए तथा प्रभावित किसानों को विश्वास में लेकर एकरूपता के साथ मुआवजा तय किया जाए।
🔹 परियोजना पूर्ण होने तक क्षतिपूर्ति
जब तक कोई परियोजना पूर्ण नहीं हो जाती, तब तक प्रभावित किसानों को प्रतिवर्ष उचित क्षतिपूर्ति प्रदान की जाए।
🔹 योजना से पूर्व भौतिक सत्यापन
किसी भी योजना को लागू करने से पहले भूमि का भौतिक परीक्षण अनिवार्य किया जाए। “कक्षों में बैठकर योजना बनाने” की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जाए।
🔹 अधिकारियों की जवाबदेही तय हो
यदि अधिग्रहण प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन होता है या मुआवजा समय पर वितरित नहीं किया जाता, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
🔹 समय सीमा का निर्धारण
हर परियोजना के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की जाए, ताकि कार्य समयबद्ध तरीके से पूर्ण हो सके।
🔹 ग्रामीण मास्टर प्लान की आवश्यकता
जिस प्रकार शहरों के लिए मास्टर प्लान तैयार किए जाते हैं, उसी प्रकार तहसील स्तर पर गांवों के लिए भी अलग मास्टर प्लान बनाए जाएं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में ही शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर विकसित होंगे तथा शहरों की ओर पलायन रुकेगा। ग्रामीण सड़क योजना का कार्य अटल बिहारी सरकार से शुरू हुआ है उसका लाभ आज सभी के सामने है। शिक्षा के नाम पर युवा संयुक्त परिवारों, संस्कारों से दूर हो रहे है
कार्यशाला में भूमि अधिग्रहण संबंधित विशेषज्ञों के साथ चौधरी , अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रमोद भारतीय किसान संघ के मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ संगठन मंत्री महेश चौधरी, राजेंद जी पालीवाल,चंद्रकांत जी गौर मालवा प्रांत संगठन मंत्री अतुल महेश्वरी,
मालवा प्रांत अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण पटेल, प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह अंजना प्रदेश महामंत्री रमेश डांगी, श्री भारत सिंह बैंस प्रान्त, दिनेश जी शर्मा सह संगठन मंत्री मंत्री महानगर अध्यक्ष दिलीप ममुकाती ने किया







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