“मृत चौकीदार के नाम पर दो बार रजिस्ट्री, गोपालपुरा-बंजारी की सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोप—इंदौर के इस्माइल खान घेरे में, प्रशासन पर उठे सवाल”
महू तहसील के ग्राम गोपालपुरा-बंजारी से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने राजस्व व्यवस्था और रजिस्ट्री प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
गांव का खसरा नंबर 79, लगभग 1.0420 हेक्टेयर (करीब 5 बीघा) क्षेत्रफल की जमीन, जो शासकीय चरनोई भूमि बताई जा रही है, अब विवादों के केंद्र में है।
बताया जा रहा है कि यह जमीन गांव के चौकीदार घिसा पिता गंगाराम को सेवा के बदले उपयोग हेतु दी गई थी। लेकिन असली विवाद इसके बाद शुरू होता है।
ग्रामीणों के अनुसार, घिसा पिता गंगाराम की मृत्यु वर्ष 1972 में हो चुकी थी। इसके बावजूद, इसी जमीन की रजिस्ट्री वर्ष 1989 में कर दी गई।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब व्यक्ति का निधन 1972 में हो चुका था, तो 1989 में रजिस्ट्री किस आधार पर और किसके नाम से हुई?
मामला यहीं खत्म नहीं होता। हैरानी की बात यह है कि इसी जमीन की एक और रजिस्ट्री वर्ष 2018 में भी कर दी गई, जिससे पूरे घटनाक्रम में संगठित फर्जीवाड़े की आशंका और गहरा गई है।
इस पूरे मामले में आरोप है कि इंदौर का कथित भू-माफिया इस्माइल खान इस जमीन पर कब्जा किए हुए है और खुद को इसका खरीदार बता रहा है।
जबकि नियम स्पष्ट हैं कि शासकीय चरनोई भूमि का क्रय-विक्रय नहीं किया जा सकता।
ऐसे में कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं—
क्या मृत व्यक्ति के नाम पर फर्जी तरीके से रजिस्ट्री की गई?
1989 और 2018 की रजिस्ट्री किन अधिकारियों की भूमिका में हुई?
क्या रजिस्ट्री और राजस्व विभाग के बीच मिलीभगत का मामला है?
क्या यह एक संगठित भू-माफिया नेटवर्क का हिस्सा है?
और सबसे अहम—क्या प्रशासन इस पर कड़ी कार्रवाई करेगा या मामला दबा दिया जाएगा?
यह पूरा प्रकरण अब जांच और जवाबदेही की मांग कर रहा है।




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