इंदौर। शहर में जमीन विवाद को लेकर प्रकाशित एक खबर ने नया मोड़ ले लिया है।
हाल ही में समाचार पत्र खुलासा फर्स्ट में प्रकाशित खबर में यूसुफ पटेल वाघेला और इस्लाम पटेल वाघेला पर 2600 स्क्वायर फीट जमीन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचने के आरोप लगाए गए थे। अब इस मामले में वाघेला परिवार की ओर से सामने आए तथ्यों ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
वाघेला परिवार का कहना है कि यह पूरी खबर तथ्यों की जांच किए बिना प्रकाशित की गई और इसका उद्देश्य केवल प्रतिष्ठित परिवार की छवि धूमिल करना तथा दबाव बनाकर अवैध वसूली करना है। परिवार ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि तथाकथित “लैंड जिहादी” तत्वों का साथ देकर कुछ लोग मीडिया का इस्तेमाल निजी हित साधने में कर रहे हैं।
“जिस जमीन की बात हो रही, वह सर्वे नंबर 1127 का हिस्सा ही नहीं”
वाघेला परिवार के अनुसार रशीद पटेल जिस 2600 स्क्वा। फीट भूखंड को अपना बता रहे हैं, वह सर्वे क्रमांक 1127 का हिस्सा ही नहीं है। परिवार का दावा है कि संबंधित भूमि हिना पैलेस कॉलोनी के अंतर्गत आती है, जिसे वर्ष 2013 में विधिवत नोटरी दस्तावेज के माध्यम से खरीदा गया था।
परिवार का कहना है कि उस नोटरी पर बाबू और माखनलाल के हस्ताक्षर आज भी मौजूद हैं और सभी दस्तावेज सुरक्षित रखे गए हैं। बाद में वर्ष 2016 में उक्त भूखंड को दूसरे पक्ष को बेच दिया गया था। ऐसे में फर्जी दस्तावेज बनाकर जमीन बेचने के आरोप पूरी तरह निराधार बताए जा रहे हैं।
युसूफ वाघेला का आरोप, खुलासा फर्स्ट का आरोप अगर सही तो पूरी हिना कॉलोनी की नोटरी भी अवैध
खुलासा फर्स्ट में बिना तथ्यों के आरोप लगाया गया हे की मेरे पास कूटरचित दस्तावेज हैं ,जो की माखनलाल और बाबू खान के द्वारा हस्ताक्षरित हैं ,अगर ये सही हे और तथ्यों के आधार पर साबित हे तो आधी से ज़यादा हिना कॉलोनी की नोटरियाँ भी अवैध हो जाएगी क्यूंकि आधी से ज़यादा नोटरियाँ हिना कॉलोनी में इन्ही दोनों के द्वारा की गयी थी।
“बिना जांच खबर छापना पत्रकारिता या प्रायोजित अभियान?”
वाघेला परिवार ने सवाल उठाया है कि आखिर बिना किसी दस्तावेजी सत्यापन और राजस्व रिकॉर्ड की जांच किए सीधे तौर पर गंभीर आरोप कैसे प्रकाशित कर दिए गए। परिवार का आरोप है कि यह पहली बार नहीं है जब खुलासा फर्स्ट और उससे जुड़े अंकुर जायसवाल द्वारा उनके खिलाफ खबरें प्रकाशित की गई हों।
परिवार के मुताबिक पूर्व में भी कई खबरों को लेकर कानूनी नोटिस भेजा गया था, लेकिन उसे लेने से तक इंकार कर दिया गया। अब मामला न्यायालय तक पहुंच चुका है और पुलिस प्रतिवेदन का इंतजार किया जा रहा है।
2023 से लंबित पुलिस प्रतिवेदन पर भी उठे सवाल
मामले में एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि वर्ष 2023 से लंबित मामले में अब तक पुलिस प्रतिवेदन प्रस्तुत क्यों नहीं किया गया। वाघेला परिवार का कहना है कि यह देरी कई संदेहों को जन्म देती है और पूरे प्रकरण में “सेटिंग और दबाव की राजनीति” की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
भूखंड बेचने के बाद समझ आया अवैध हिना कॉलोनी का सच
युसूफ वाघेला का कहना हे की हमारे द्वारा भूखंड बेचने के बाद हमें पता लगा की हिना कॉलोनी बाबू खान और माखनलाल द्वारा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि उस्मान पटेल के इशारों पर बसाई गयी हे ,इसी अवैध कॉलोनी में कई भूमियां ऐसी हैं जो शासकीय चरागाह और सीलिंग की भी शामिल हैं और इसीलिए तत्समय कलेक्टर द्वारा कॉलोनी को अवैध घोषित किया गया था ,ये वही लैंड जिहादी लोग हैं जिन्होंने न सिर्फ सरकार को धोखा दिया बल्कि अपनी कौम के साथ भी गद्दारी की हे।
“प्रतिष्ठा धूमिल करने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई”
वाघेला परिवार ने साफ कहा है कि बिना तथ्य और दस्तावेजों के झूठी खबरें प्रकाशित कर सामाजिक प्रतिष्ठा खराब करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। परिवार का दावा है कि न्यायालय में सभी मूल दस्तावेज और रिकॉर्ड प्रस्तुत किए जाएंगे, जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी।






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