नीरज द्विवेदी (9993949000) इंदौर
खजराना के विवादित पटेल नगर को लेकर लगातार सामने आ रहे दस्तावेज, न्यायालयीन तथ्य और सरकारी रिकॉर्ड अब इस ओर संकेत कर रहे हैं कि आज नहीं तो कल इस पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई होना लगभग तय है। लेकिन करोड़ों की सरकारी जमीन पर खड़े इस कथित खेल में सबसे बड़ा सवाल अब उन रहवासियों पर आकर टिक गया है, जिन्होंने कम कीमत के लालच में भूखंड खरीदे और वर्षों से वहां निवास कर रहे हैं।
*क्या रहवासी ही खोलेंगे पर्दे के पीछे बैठे चेहरों का राज?*
विधि विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पटेल नगर के रहवासी स्वयं सामने आकर यह नहीं बताएंगे कि उन्होंने भूखंडों के लिए भुगतान किसे, किन शर्तों पर और किस प्रकार किया था, तब तक पर्दे के पीछे बैठे कथित "लैंड जिहादियों" तक पहुंचना आसान नहीं होगा। बताया जा रहा है कि कई लोगों से त्रैमासिक और वार्षिक किस्तों के आधार पर राशि वसूली गई थी। यदि इन भुगतानों के दस्तावेज और वास्तविक लाभार्थियों के नाम सामने आ जाते हैं तो पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
सूत्रों के अनुसार रहवासियों को वर्षों से विभिन्न प्रकार के आश्वासन और लालच देकर भ्रमित रखा गया, लेकिन अब सवाल यह है कि अपनी जीवन भर की कमाई को बचाने के लिए सच सामने लाया जाए या फिर भ्रम में जीते हुए भविष्य की अनिश्चितता का इंतजार किया जाए।
*अगर कार्रवाई हुई तो विस्थापन कैसे होगा?*
सबसे बड़ा और संवेदनशील प्रश्न यह भी है कि यदि प्रशासन जागता है और करोड़ों की इस बहुमूल्य सरकारी जमीन पर कार्रवाई होती है, तो वर्षों से रह रहे परिवारों का पुनर्वास या विस्थापन किस प्रकार किया जाएगा?
नगर निगम पिछले कुछ वर्षों में छावनी, गुटकेश्वर, सदर बाजार और एलआईजी लिंक रोड से बर्फानी धाम रोड तक सड़क चौड़ीकरण के नाम पर बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ कर चुका है, लेकिन पटेल नगर की बहुमूल्य भूमि पर आज तक किसी प्रकार की कार्रवाई न होना अपने आप में कई सवाल खड़े कर रहा है।
*क्या फर्जी याचिका के सहारे रुकी कार्रवाई?*
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू वह स्थगन आदेश है, जिसके आधार पर प्रशासन अब तक मौन दिखाई देता है। जानकारी के अनुसार जिस WP/1950/2017 का हवाला दिया जाता रहा, उसे लेकर स्वयं कुछ किसानों ने दावा किया है कि उन्होंने ऐसी कोई याचिका दायर ही नहीं की थी और उनके नाम का इस्तेमाल कर कथित तौर पर फर्जी तरीके से पूरी प्रक्रिया संचालित की गई।
यदि यह दावा सही साबित होता है तो मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि न्यायालय को गुमराह करने और सरकारी रिकॉर्ड के दुरुपयोग जैसे गंभीर पहलू भी सामने आ सकते हैं।
गौरतलब है कि इसी याचिका क्रमांक WP/1950/2017 में वर्तमान महापौर पुष्यमित्र भार्गव उस समय अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) के रूप में शासन की ओर से पैरवी कर चुके थे। ऐसे में यह प्रश्न भी उठ रहा है कि शासन की ओर से उस समय कौन-कौन से तथ्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए थे और आज सामने आ रहे दावों की जांच किस स्तर पर होगी।
*अगली कड़ी में होंगे कई बड़े खुलासे*
वाघेला एक्सप्रेस को प्राप्त दस्तावेजों और बयानों के आधार पर इस बहुचर्चित मामले की अगली कड़ी में उन नामों, भुगतान व्यवस्था, कथित एजेंटों और पर्दे के पीछे से पूरे खेल को संचालित करने वाले प्रभावशाली चेहरों पर बड़ा खुलासा किया जाएगा। हमारे द्वारा खजराना के ही शासकीय सर्वे नंबर 444 442/1 ताज नगर 325/3 पटेल नगर (जिसका हम लगातार खुलासा कर रहे हैं) , 1104 हिना कॉलोनी और 1121 हिना कॉलोनी के पास के सम्बन्ध में हमारे द्वारा प्रारंभिक जांच और दस्तवेजों में रफ़ीक़, मंसूर, इस्लाम, साज़िद उर्फ लक्की, माखनलाल के नाम सामने आ रहे हैं आगे कई बड़े नामो के आने की भी उम्मीद हे।
अब पूरा शहर पूछ रहा है— करोड़ों की सरकारी जमीन पर वर्षों से फल-फूल रहे इस खेल का अंत कब होगा और आखिर संरक्षण किसका है?




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