जनता ने चुना पार्षद, महापौर को सौंपी शहर की कमान... फिर भी आज़ादी के दशकों बाद भी कीचड़ में ज़िंदगी!

 जनता ने चुना पार्षद, महापौर को सौंपी शहर की कमान... फिर भी आज़ादी के दशकों बाद भी कीचड़ में ज़िंदगी!


पार्षद भी अपने, महापौर भी अपने...

जनता ने भरोसा किया, बदले में मिली खराब कच्ची सड़क!


वोट की कीमत गड्ढे? कॉलेज कॉलोनी की बदहाल सड़क ने खोली विकास की हकीकत



इंदौर। शहर के विकास और स्मार्ट सिटी के दावों के बीच खजराना में विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 05 व वार्ड क्रमांक 40 की कॉलेज कॉलोनी आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। करीब 25 वर्षों से बदहाल सड़क स्थानीय रहवासियों के लिए रोज़ की परेशानी बन चुकी है। सड़क जगह-जगह से उखड़ी हुई है, बड़े-बड़े गड्ढे हैं और बरसात के मौसम में इन गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही उनकी समस्याएं फाइलों में दबकर रह जाती हैं।


कॉलेज कॉलोनी के लोगों का कहना है कि उन्होंने लोकतंत्र में विश्वास रखते हुए अपने जनप्रतिनिधियों को चुना। पार्षद को वार्ड की जिम्मेदारी सौंपी और महापौर को पूरे शहर के विकास की कमान दी। उम्मीद थी कि सड़क, नाली, पानी और सफाई जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान होगा, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी सड़क की हालत नहीं बदली। अब लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर उनके वोट का सम्मान कब होगा?


स्थानीय नागरिकों के अनुसार सड़क इतनी खराब हो चुकी है कि दोपहिया वाहन लेकर निकलना भी जोखिम भरा हो गया है। कई बार वाहन चालक गड्ढों में फिसलकर घायल हो चुके हैं। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। बारिश के दौरान सड़क और नाली का अंतर तक समझ में नहीं आता, जिससे हर समय हादसे का डर बना रहता है।


रहवासियों का कहना है कि कई बार नगर निगम और संबंधित अधिकारियों को शिकायतें दी गईं। जनप्रतिनिधियों को भी क्षेत्र की समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। कभी बजट का हवाला दिया गया तो कभी जल्द काम शुरू होने की बात कही गई, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई स्थायी सुधार दिखाई नहीं दिया।


क्षेत्र के व्यापारियों का कहना है कि खराब सड़क का असर उनके कारोबार पर भी पड़ रहा है। ग्राहक खराब रास्ते के कारण आने से बचते हैं। धूल उड़ने से दुकानों में गंदगी रहती है और बरसात में जलभराव के कारण लोगों का आना-जाना प्रभावित होता है। इससे आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।


कॉलेज कॉलोनी के रहवासी सवाल उठा रहे हैं कि यदि शहर में नई-नई सड़कों और विकास परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा सकते हैं, तो वर्षों से बदहाल इस सड़क की सुध क्यों नहीं ली जा रही? उनका कहना है कि विकास केवल बड़े-बड़े आयोजनों और घोषणाओं से नहीं, बल्कि आम नागरिकों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं से दिखाई देता है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण एम्बुलेंस, स्कूल बस और अन्य आवश्यक सेवाओं के वाहनों को भी कठिनाई होती है। कई बार बारिश के दौरान वाहन बीच रास्ते में फंस जाते हैं। यदि किसी मरीज को तत्काल अस्पताल ले जाना पड़े तो खराब सड़क बड़ी बाधा बन जाती है।


रहवासियों का आरोप है कि चुनाव से पहले क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों की आवाजाही बढ़ जाती है। विकास के वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें अब भाषण और आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क पर काम दिखाई देना चाहिए।


क्षेत्र के युवाओं का कहना है कि आज के दौर में जब शहर को आधुनिक और स्मार्ट बनाने की बात की जा रही है, तब कॉलेज कॉलोनी जैसी आबादी वाली बस्ती की सड़क वर्षों से बदहाल होना चिंताजनक है। उनका मानना है कि यह केवल सड़क का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी विषय है।


रहवासियों ने नगर निगम प्रशासन, संबंधित पार्षद और महापौर से मांग की है कि कॉलेज कॉलोनी की सड़क का सर्वे कराकर जल्द से जल्द गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए। साथ ही निर्माण कार्य की समय-सीमा सार्वजनिक की जाए, ताकि लोगों को बार-बार आश्वासनों का इंतजार न करना पड़े।


अब वार्ड क्रमांक 40 की जनता एक ही सवाल पूछ रही है—"जब पार्षद भी अपने हैं और महापौर भी अपने हैं, तो आखिर 25 साल से सड़क बदहाल क्यों है?" यह सवाल केवल एक सड़क का नहीं, बल्कि जनता के विश्वास, विकास के दावों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही का भी है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद करेंगे और संबंधित अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगेंगे।


 कॉलेज कॉलोनी पार्षद के घर तक सीमेंटेड सड़क, महापौर के क्षेत्र में चमकता विकास... लेकिन कॉलेज कॉलोनी आज़ादी के बाद से कीचड़ और दलदल में!वार्ड-40 के रहवासियों का सवाल— क्या विकास सिर्फ़ खास इलाकों तक सीमित है?

सद्दाम पटेल रहवासी



 कॉलेज कॉलोनी के रहवासी वर्षों से जर्जर सड़क, कीचड़ और जलभराव की समस्या झेल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बारिश में सड़क दलदल में बदल जाती है और पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। बच्चों को स्कूल जाने, बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचने और रोज़मर्रा के आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

असगर पटेल बॉस



रहवासियों का आरोप है कि क्षेत्र की सड़क लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है। उनका कहना है कि आसपास के कई इलाकों में सीमेंटेड सड़कें बन चुकी हैं, जबकि कॉलेज कॉलोनी आज भी मूलभूत सड़क सुविधा का इंतज़ार कर रही है।

आशिक़ पटेल रहवासी


स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेकर अपने पार्षद और महापौर को चुना था, ताकि क्षेत्र का विकास हो सके। लेकिन आज भी सड़क की बदहाली लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। रहवासियों का सवाल है कि विकास की योजनाओं का लाभ कॉलेज कॉलोनी तक कब पहुंचेगा?

बारिश के मौसम में सड़क पर जलभराव और कीचड़ के कारण दोपहिया वाहन फिसलने की घटनाएं सामने आती हैं। कई बार एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाओं के वाहनों को भी कठिनाई होती है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि खराब सड़क का असर उनके कारोबार पर भी पड़ रहा है।

मोहसीन आजाद पटेल


क्षेत्रवासियों ने नगर निगम, संबंधित पार्षद और महापौर से मांग की है कि कॉलेज कॉलोनी की सड़क का शीघ्र निर्माण कराया जाए। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम दिखाई देना चाहिए।

जावेद पटेल


क्षेत्रीय पार्षद वार्ड 40 पुष्पेंद्र पाटीदार से जब वाघेला एक्सप्रेस ने चर्चा करना चाह तो फोन लगाया लेकिन उठाया नहीं

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