भूमाफिया के गुर्गों का दुस्साहस, पुलिस कर्मियों के सिर फोड़े,फिर भी मस्त

 





भूमाफिया के गुर्गों का दुस्साहस, पुलिस कर्मियों के सिर फोड़े,फिर भी मस्त


पीटे हुए दोनों पुलिस कर्मी कैसे निभाएंगे दायित्व ? या जीवन भर कुंठा में जियेंगे ?


इंदौर । (राजेन्द्र के गुप्ता 9827070242/सात्विक गुप्ता 8959346146) कनाड़िया थाना क्षेत्र में एक संस्था की डायमंड नगर नाम से कॉलोनी है, इसकी जमीन पर गरीब पिछले 35—40 वर्षों से प्लाट खरीद कर वैधानिक रूप से बसे हुए है, इंदौर के संघवी सरनेम के भूमाफिया परिवार की नजर इस भूमि पर है क्योंकि अब ये भूमि अरबों रुपयों की हो चुकी है। यहां मॉल बनाने की जानकारी सूत्र से मिल रही है इसलिए गरीबों को उजाड़ कर भूमि को कब्जाने की कोशिश की जा रही है। इसी सिलसिले में भूमाफिया के गुर्गों ने पुलिस के दो कर्मचारियों पर हमला करके दोनों के सिर फोड़ दिए है, इतना दुस्साहस तो बड़े माफिया का संरक्षण होने से ही आता है वर्ना गुर्गे पुलिस पर इतना खतरनाक हमला नहीं कर सकते है वो भी इंदौर जैसे शहर में जहां संतोष सिंह जैसे दबंग पुलिस कमिश्नर पदस्थ हो !!! पूर्व में नामी गुंडे बब्बू, छब्बू का हश्र टूटपुंजे गुंडे देख चुके है। दिनांक 22/06/26 को भूमाफिया के गुर्गों ने दुस्साहस दिखा कर, ऑन ड्यूटी दो पुलिस कर्मियों के सिर फोड़े दिए फिर भी आरोपी मस्त है, ना भागने में हाथ, पैर टूटे, ना सभी आरोपी पकड़ में आए, मुख्य साजिशकर्ता थाने आया और शान से वापस चला गया....


सरगना स्वयं कबूलेगा क्या ?—


इस मामले में पुलिस ने प्रतीक संघवी से पूछताछ के लिए थाने तलब किया था, सूत्र और प्रमुख अखबार की खबर बता रही है कि पंकज संघवी भी थाने पर मौजूद था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस ने प्रतीक संघवी से पूछा है कि आपका क्या रोल है, अब सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस संदिग्ध से पूछ कर ही उसे आरोपी बनाती है !!!? क्या सरगना स्वयं कबूलेगा की उसके ही कारण दो पुलिस कर्मचारियों का सिर फोड़ने और शासकीय कार्य में बाधा डालने का अपराध घटित किया गया है। 


क्या जिन्हें गिरफ्तार किया है उन्होंने स्वीकारा है ?—


जिस तरह प्रतीक से पूछा गया है उसी तरह,  जिन्हें गिरफ्तार किया है उनसे पूछा गया है क्या ? क्या गिरफ्तार आरोपियों ने स्वयं पुलिस पर हमला करना  स्वीकारा है ? तो गिरफ्तार आरोपियों के बयान कोर्ट में करवा देना चाहिए। जिससे वो कोर्ट में बदले नहीं।


एफआईआर में 08—10 हमलावर लिखे है


जिन पुलिस कर्मचारियों पर हमला करके घायल किया है उन्होंने अपनी शिकायत में 08 से 10 हमलावर लिखाए है, पुलिस का सिर फोड़ने पर भी दो दिन विलंब से एफआईआर लिखने वाले थाना प्रभारी सहर्ष यादव के द्वारा चार आरोपियों को गिरफ्तार करके प्रकरण में लीपापोती कर रहे है। जबकि जिन पुलिस कर्मचारियों पर हमला हुआ है वो ट्रेनिंग प्राप्त और इन घटनाओं को समझने वाले पुलिस कर्मचारी है उन्होंने निश्चित ही आरोपियों की संख्या को अच्छे से देखा, गिना होगा क्योंकि वो झगड़ा होने पर उसे रोकने पहुंचे थे, इसलिए हमला अचनक नहीं सोच समझ कर और जानबूझ कर किया गया है। संभव पुलिस कर्मचार्मियों पर हमला करने के पहले गुर्गों ने अपने आकाओं से सहमति भी ली होगी। आकाओं से सब संभाल और निपटा लेने का आश्वासन दिया होगा तभी पुलिस कर्मचारियों पर हमला किया होगा। मुख्य साजिशकर्ता पर कठोर कार्रवाई नहीं होने पर ही इस तरह के संगठित अपराध बढ़ रहे है।


22/06 को पुलिस कर्मचारियों से हुई मारपीट —


पुलिस कर्मचारियों से हुई मारपीट पर एफआईआर दर्ज करवाने वाले विजय सिकरवार ने एफआईआर क्रमांक 0492/2026 में ये लिखवाया— मैं थाना कनाडिया पर आरक्षक के पद पर पदस्थ होकर कार्यरत हूँ दिनांक 21/06/2026 को मेरी ड्युटी बीट संचार नगर में आरक्षक 3198 आशीष शर्मा के साथ रात्री 22.00 बजे से दिनांक 22/06/2026 के प्रातः 08.00 बजे तक लगी थी । दिनांक 22/06/2026 के रात्री करीब 12.45 बजे हमे डायमंड कालोनी के लोगो द्वारा कालोनी के रहवासी व संयम इन्फ्रा कंपनी के लोगो के बीच झगडा होने की सूचना प्राप्त हुई थी। तब मैं मेरे साथी आर 3198 आशीष शर्मा के साथ भ्रमण करते मोटर सायकल से डायमंड कालोनी संचार नगर कनाडिया रोड इन्दौर पर रात्री मे पहुचे जहाँ संयम इन्फ्रा कंपनी व डायमंड कालोनी के रहवासीगण के बीच झगडा चल रहा था। मेरे द्वारा व आर 3198 आशीष शर्मा के द्वारा दोनो पक्षो के बीच में पहुचकर अलग- अलग करने का प्रयास कर रहे थे तभी करीब 08-10 लोगो ने हमे गंदी गंदी गालिया बकते हुये पत्थर फेक कर मारा जिससे मुझे सिर में पीछे की और चोट लगी तथा खून निकलने लगा तथा मेरे साथी आरक्षक 3198 आशीष शर्मा को किसी ने लकडी का डंडा मारा जो उसके सिर में पीछे की और चोट लगी और खुन निकलने लगा । उसके पश्चात हमे चोट ज्यादा लगने से हम दोनो आरक्षक अपने इलाज हैतु नोवल हास्पिटल विचोली हप्सी कनाडिया पर पहुंचे जहां हम लोगो प्रायवेट इलाज करवाया जिसके उपचार के दस्तावेज पृथक से पेश कर देगे । अज्ञात 8-10 व्यक्तियो के द्वारा हमारे ऊपर ड्यूटी पर होते हुये हमला कर शासकीय कार्य मे बाधा पहुंचाई गई। हमारे साथ किन लोगो ने हमारे उपर पत्थर एवं डंडे से हमला किया हम नही जानते है सामने आने पर पहचान लेंगे । घटना डायमंड कालोनी के लोगो ने देखी है बाद मे थाना रिर्पोट करता हूं कार्यावाही की जावें । 


मुख्य साजिशकर्ता को सबक नहीं सिखाया तो बड़े अफसर के गिरेबान तक पहुंचेंगे हाथ —


अगर इस घटना के बाद जब पीड़ित पुलिस कर्मचारी ड्यूटी निभाते हुए गुंडों के हमले से घायल हुए है और उन्होंने 08—10 आरोपी लिखाए है फिर भी पुलिस चार को गिरफ्तार करके मामले की मुख्य साजिशकर्ता को गिरफ्तार नहीं करेगी तो निश्चित ही बड़े माफिया सिस्टम को खरीद लेने का दंभ भर कर कभी भी बड़े अफसरों के गिरेबान पर हाथ डालने से हिचकिचाएंगे नहीं।


एफआईआर में संयम इंफ्रा कंपनी का नाम


गुंडों की पिटाई से घायल हुए पुलिस कर्मचारी विजय सिकरवार और आशीष शर्मा ने एफआईआर में संयम इंफ्रा कंपनी के लोगो के बीच झगड़ा होने की बात साफ लिखवाई है अर्थात जब दोनों पुलिस कर्मचारी ड्यूटी के दौरान झगड़ा रोकने गए और मौके पर उन्होंने जानकारी ली तो उन्हें संयम इंफ्रा के लोगों के द्वारा झगड़ा करने की पुष्टि कारक जानकारी मिली तभी पीड़ित पुलिस कर्मचारियों ने संयम इंफ्रा का नाम लिखवाया है। जिससे यह प्रमाणित होता है कि संयम इंफ्रा के मालिकों के कहने पर ही पुलिस कर्मचारियों पर हमला किया गया है, निश्चित ही संयम इंफ्रा के मालिक इस अपराध में शामिल है ,जो पुलिस एफआईआर से ही प्रमाणित होता है ।


प्रतीक का वीडियो बता रहा है वो आश्वस्त था —


दिनांक 30/06/2026 को पुलिस ने प्रतीक संघवी को पूछताछ के लिए थाने पर बुलाया था, उसी दौरान थाने का एक वीडियो न्यूज में वायरल हुआ है, उस वीडियो को देख कर साफ लगता है कि प्रतीक को थाना प्रभारी ने छोड़ देने के लिए आश्वस्त किया हुआ था, प्रतीक भय की बजाए इशारेबाजी करता नजर आ रहा है। अब इस स्थिति में पीड़ित पुलिस कर्मचारी जीवन भर के लिए वर्दी का रौब भूल जाएंगे और भय में नौकरी करेंगे.....पढ़ते रहें खबर अभी जारी है....

Post a Comment

0 Comments