बच्चों की राह में ‘करंट का खतरा’! नोबल पब्लिक स्कूल के पास सड़क के बीच 3 मौत-द्वार बिजली खंभे, बिजली विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल


इंदौर। स्कीम नंबर 94 के बेगम बाग इलाके में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नोबल पब्लिक स्कूल के पास सड़क के बीचों-बीच तीन बिजली के खंभे खड़े नजर आ रहे हैं। जिस रास्ते से रोजाना स्कूली बच्चे, अभिभावक, दोपहिया वाहन और अन्य राहगीर गुजरते हैं, उसी सड़क पर ये खंभे किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सड़क के बीच बिजली के तीन खंभे किसकी अनुमति और किसकी निगरानी में खड़े हैं? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस खतरे पर नहीं पड़ी या फिर शिकायत के बावजूद इसे नजरअंदाज किया जा रहा है?

🚨 बच्चों की राह में खतरे के तीन ‘खंभे’


नोबल पब्लिक स्कूल के आसपास सुबह और दोपहर के समय बच्चों और अभिभावकों की आवाजाही रहती है। स्कूल के आने-जाने के समय सड़क पर वाहनों का दबाव भी बढ़ जाता है। ऐसे में सड़क के बीच खड़े तीन बिजली के खंभे यातायात व्यवस्था के लिए भी परेशानी पैदा कर सकते हैं।

स्कूल, मंदिर और क्लिनिक के बीच ‘बिजली का खतरा’! सड़क के बीच 3 खंभे, हादसे का इंतजार कर रहा बिजली विभाग?

स्कीम नंबर 94 के बेगम बाग में नोबल पब्लिक स्कूल के पास सड़क के बीचों-बीच तीन बिजली के खंभे खड़े हैं। आसपास स्कूल, मंदिर और क्लिनिक होने से यहां बच्चों, श्रद्धालुओं, मरीजों और आम राहगीरों की लगातार आवाजाही रहती है। ऐसे में सड़क के बीच खड़े बिजली के पोल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल—अगर कल कोई हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी? बिजली विभाग इन खंभों को सुरक्षित स्थान पर कब शिफ्ट करेगा?

एक तरफ स्कूल, दूसरी तरफ बच्चों की भीड़ और बीच सड़क में बिजली के पोल—यह तस्वीर किसी भी जिम्मेदार विभाग के लिए चिंता का विषय होनी चाहिए। जरा सी चूक, वाहन का संतुलन बिगड़ा और बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इन खंभों से टकराकर कोई बच्चा, अभिभावक या वाहन चालक घायल होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या बिजली विभाग हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी दुर्घटना के बाद ही अधिकारियों की नींद खुलेगी?

स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि बिजली के खंभों की ऐसी स्थिति के लिए संबंधित विभाग ने सुरक्षा मानकों का निरीक्षण किया है या नहीं। यदि सड़क निर्माण या अन्य विकास कार्यों के दौरान सड़क की स्थिति बदली है तो बिजली के खंभों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की जिम्मेदारी किसकी है, यह भी स्पष्ट होना चाहिए।

 करंट वाली व्यवस्था’ पर सवाल

सरकारी विभागों की जिम्मेदारी केवल बिजली पहुंचाना ही नहीं, बल्कि बिजली के बुनियादी ढांचे को सुरक्षित रखना भी है। स्कूल के पास सड़क के बीच खड़े तीन खंभे व्यवस्था की ऐसी तस्वीर पेश कर रहे हैं, जिस पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

बच्चे देश का भविष्य हैं, लेकिन उनके स्कूल के रास्ते में ही अगर खतरे के खंभे खड़े हों तो फिर सुरक्षा के दावों का क्या मतलब?

अब जरूरत है कि बिजली विभाग मौके का निरीक्षण करे, खंभों की स्थिति और सड़क की सुरक्षा का परीक्षण कराए और यदि ये पोल यातायात के बीच बाधा बन रहे हैं तो उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।

क्योंकि हादसा होने के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि खतरे को पहले ही 3 द्वार को हटा दिया जाए। सवाल सीधा है—स्कीम नंबर 94 के बेगम बाग में जिम्मेदार विभाग कार्रवाई कब करेगा?

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